पटना | गुरुवार, 7 मई 2026
बिहार की सियासत में आज एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान उस समय गूंज उठा जब पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे, निशांत कुमार ने आधिकारिक तौर पर मंत्री पद की शपथ ली। वर्षों तक खुद को राजनीतिक चकाचौंध से दूर रखने वाले निशांत का यह कदम जेडीयू (JDU) के लिए एक नई पीढ़ी के नेतृत्व की शुरुआत माना जा रहा है।
शपथ ग्रहण और भावुक क्षण
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन ने गांधी मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में निशांत कुमार को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर मंच पर एक अत्यंत भावुक क्षण तब देखने को मिला जब निशांत ने शपथ लेने के बाद अपने पिता नीतीश कुमार के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। नीतीश कुमार, जो अब राज्यसभा सदस्य के रूप में नई भूमिका में हैं, ने मुस्कुराते हुए बेटे की पीठ थपथपाई।
इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बना दिया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली कैबिनेट के इस विस्तार में निशांत कुमार के साथ कुल 32 मंत्रियों ने शपथ ली।
कौन हैं निशांत कुमार? (अध्यात्म से सत्ता तक का सफर)
44 वर्षीय निशांत कुमार पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं (BIT मेसरा से स्नातक)। उनकी छवि अब तक एक शांत और आध्यात्मिक व्यक्ति की रही है।
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पुरानी धारणा: 2017 में उन्होंने स्पष्ट कहा था कि उनकी रुचि राजनीति में नहीं बल्कि आध्यात्म में है।
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बदलाव: 8 मार्च 2026 को उन्होंने आधिकारिक तौर पर जेडीयू की सदस्यता ली और हाल ही में ‘बिहार सद्भावना यात्रा’ के जरिए कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित किया।
कैबिनेट में जेडीयू और भाजपा का तालमेल
शपथ लेने वालों में पुराने दिग्गजों और नए चेहरों का मिश्रण दिखा:
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जेडीयू से: श्रवण कुमार, लेसी सिंह, अशोक चौधरी और मदन सहनी।
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भाजपा से: विजय कुमार सिन्हा (पूर्व डिप्टी सीएम), दिलीप जायसवाल और संजय सिंह टाइगर।
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अन्य सहयोगी: चिराग पासवान की पार्टी (LJP-R), जीतन राम मांझी की (HAM) और उपेंद्र कुशवाहा की (RLM) के प्रतिनिधियों को भी जगह मिली है।
नोट :
मीडिया रिपोर्टों और गलियारों में चल रही चर्चाओं के बीच कुछ महत्वपूर्ण बिंदु ध्यान देने योग्य हैं:
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विभागों का बंटवारा: फिलहाल विभागों की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि निशांत कुमार को आईटी (IT) या शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग मिल सकते हैं।
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परिवारवाद पर रुख: नीतीश कुमार हमेशा परिवारवाद के मुखर विरोधी रहे हैं। जेडीयू नेताओं का तर्क है कि निशांत ने सीधे उच्च पद नहीं लिया, बल्कि पार्टी कार्यकर्ता के रूप में जमीन पर काम करने के बाद इस जिम्मेदारी को स्वीकार किया है।
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