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दिल्ली में ‘लव जिहाद’ का सनसनीखेज मामला: पहचान छिपाकर की शादी, बच्चा होने पर खुला राज

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भारतीय न्याय संहिता की प्रति, जो महिला सुरक्षा कानूनों को दर्शाती है।

नई दिल्ली । रविवार, 10 मई 2026

दिल्ली के नबी करीम इलाके से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर एक हिंदू युवती को प्रेम जाल में फंसाया और उससे विवाह किया। पीड़िता, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली है, हरियाणा के कोंडली में अपने पिता के साथ रहती थी।

1. सोनू दुबे बनकर किया प्रेम का नाटक

युवती के पड़ोस में रहने वाले मोहम्मद बारिश ने अपनी पहचान ‘सूनू दुबे उर्फ पंडित’ के रूप में बताई। युवती को झांसे में लेकर आरोपी ने आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से उससे शादी कर ली। शादी के बाद वे कोंडली में ही रहने लगे और पीड़िता को लंबे समय तक उसकी असली पहचान का संदेह नहीं हुआ।

2. अस्पताल में खुला राज

सच्चाई तब सामने आई जब युवती ने एक बच्चे को जन्म दिया। अस्पताल में ही आरोपी ने स्वीकार किया कि वह मुस्लिम है। इसके बाद पीड़िता के जीवन में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। आरोप है कि उस पर धर्म परिवर्तन (निकाह) के लिए दबाव बनाया जाने लगा और इनकार करने पर उसे बेरहमी से पीटा गया व जान से मारने की धमकियां दी गईं।

3. ‘सखी केंद्र’ और दिल्ली पुलिस की तत्परता

किसी तरह आरोपियों के चंगुल से भागकर पीड़िता अपनी बहन के पास दिल्ली पहुंची। वहां उसने सखी (One Stop Center) के अधिकारियों से मदद मांगी। सखी केंद्र की मदद से 2 मई को नबी करीम थाने में शिकायत दी गई।

  • कानूनी कार्रवाई: दिल्ली पुलिस ने बीएनएस (BNS) की धारा 69 (शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाना) और धारा 506 (धमकी देना) के तहत मामला दर्ज किया है।

  • जीरो एफआईआर (Zero FIR): चूंकि मुख्य घटना स्थल कोंडली (हरियाणा) है, इसलिए दिल्ली पुलिस ने जीरो FIR दर्ज कर मामले को हरियाणा पुलिस को ट्रांसफर कर दिया है।

4. फर्जी दस्तावेजों का बड़ा खुलासा

जांच के दौरान सखी केंद्र और पुलिस सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि आरोपी मोहम्मद बारिश और उसके परिवार के सदस्यों के पास दो-दो आधार कार्ड मौजूद हैं। यह मामला केवल धोखाधड़ी का ही नहीं, बल्कि सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ और पहचान की जालसाजी का भी है, जिसकी अब गहनता से जांच की जा रही है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • कानूनी स्पष्टीकरण: पहले ऐसे मामलों में आईपीसी की धाराओं का प्रयोग होता था, लेकिन अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई की जा रही है। धारा 69 विशेष रूप से पहचान छिपाकर या धोखे से संबंध बनाने को कवर करती है।

  • प्रक्रिया: जीरो FIR का अर्थ यह नहीं है कि कार्रवाई दिल्ली में होगी; यह केवल त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए है ताकि पीड़िता को अधिकार क्षेत्र के चक्कर में न भटकना पड़े।

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