लखनऊ. उत्तर प्रदेश का संभल जिला एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क और संदिग्ध गतिविधियों के केंद्र में आ गया है। गाजियाबाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत संभल की रहने वाली एक महिला समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह नेटवर्क भारत के संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों (Defense Establishments) की तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान समेत अन्य देशों में बैठे आकाओं को भेज रहा था।
सोशल मीडिया ग्रुप और ‘मौलाना’ का जाल
पकड़ी गई महिला की पहचान इरम उर्फ शाने मेहराज के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि इरम का संपर्क सोशल मीडिया के जरिए एक संदिग्ध मौलाना से हुआ था।
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इंटरनेट मीडिया का इस्तेमाल: सूत्रों के मुताबिक, एक व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप बनाया गया था जिसमें इरम सक्रिय थी।
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डेटा ट्रांसफर: इस ग्रुप के जरिए दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों के प्रतिबंधित क्षेत्रों की लोकेशन और वीडियो विदेशी नंबरों पर साझा किए जा रहे थे।
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पारिवारिक पृष्ठभूमि: इरम मूल रूप से संभल के ज्ञानपुर सिसौना की रहने वाली है और उसकी शादी दीपा सराय के एक ट्रक चालक फैजान से हुई थी। वे वर्तमान में गाजियाबाद के मसूरी में रह रहे थे।
ईद मनाने आई थी संभल, वहीं से हुई गिरफ्तारी
इरम अपने पति और दो साल के बेटे के साथ ईद की खुशियां मनाने ससुराल (संभल) आई हुई थी। इसी दौरान गाजियाबाद की कौशांबी थाना पुलिस और खुफिया तंत्र ने दबिश देकर उसे हिरासत में ले लिया। पुलिस ने इरम और उसके पति फैजान का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है, जिसकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है ताकि डिलीट किए गए डेटा को रिकवर किया जा सके।
दीपा सराय: जांच एजेंसियों के लिए ‘पुराना सिरदर्द’
इस मामले ने संभल के दीपा सराय इलाके को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। यह इलाका लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर रहा है:
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आसिम उमर का कनेक्शन: इसी इलाके का निवासी आसिम उमर अलकायदा (AQIS) का दक्षिण एशिया प्रमुख बना था, जो 2019 में अमेरिकी ऑपरेशन में मारा गया।
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शारिक साठा: नवंबर 2024 की हिंसा के मास्टरमाइंड शारिक साठा के तार भी इसी इलाके से जुड़े थे।
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ISIS और NIA: 2023 और 2024 में एनआईए (NIA) ने यहाँ कई बार छापेमारी कर आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है।
एजेंसियों की अगली कार्रवाई: ‘स्लीपर सेल’ का शक?
सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की गहराई से जांच कर रही हैं कि क्या यह कोई ‘हनीट्रैप’ का मामला है या फिर यह एक सुनियोजित ‘स्लीपर सेल’ का हिस्सा है।
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ATS की एंट्री: उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) इस मामले में महिला के डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगाल रही है।
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बैंक खातों की जांच: क्या इन सूचनाओं के बदले महिला या उसके सहयोगियों को विदेशों से फंडिंग मिल रही थी? इसकी भी जांच तेज कर दी गई है।
एएसपी संभल, कुलदीप सिंह का बयान: “हमें मीडिया के माध्यम से मामले की जानकारी मिली है। फिलहाल गाजियाबाद पुलिस ने औपचारिक रूप से संपर्क नहीं किया है, लेकिन हम स्थानीय स्तर पर महिला की पृष्ठभूमि और संपर्कों की गहनता से जांच कर रहे हैं।”
संभल का नाम बार-बार अंतरराष्ट्रीय आतंकी और जासूसी नेटवर्क से जुड़ना चिंता का विषय है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार बैठे हैंडलर्स अब स्थानीय लोगों को छोटे-छोटे लालच देकर जासूसी के जाल में फंसा रहे हैं। इस गिरफ्तारी से एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।
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