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वाराणसी: NEET छात्र के घर 8 घंटे ATS की छापेमारी, पाकिस्तानी ‘हाफिज सईद’ नेटवर्क से जुड़े तार

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लखनऊ | बुधवार, 15 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी का आदमपुर इलाका मंगलवार सुबह उस समय छावनी में तब्दील हो गया, जब यूपी ATS, महाराष्ट्र ATS और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के करीब एक दर्जन अधिकारियों ने अचानक डॉ. आरिफ के घर पर दस्तक दी। यह कार्रवाई किसी स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संदिग्ध नेटवर्क की जांच के सिलसिले में की गई।

टीम का मुख्य निशाना डॉ. आरिफ का 18-19 वर्षीय पुत्र अबु बकर था, जो वर्तमान में NEET (मेडिकल प्रवेश परीक्षा) की तैयारी कर रहा है। सुरक्षा एजेंसियों ने घर के सदस्यों को हिरासत में लेकर करीब 8 घंटे तक गहन पूछताछ की।

मुंबई FIR और पाकिस्तान कनेक्शन

सूत्रों के अनुसार, इस छापेमारी की जड़ें मुंबई में दर्ज एक FIR से जुड़ी हैं। जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को एक संदिग्ध टेलीग्राम ग्रुप का लिंक मिला था। इस ग्रुप की गतिविधियों को ट्रैक करने पर पता चला कि इसके तार सीमा पार पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और संभवतः हाफिज सईद के नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

जांच में अबु बकर की डिजिटल मौजूदगी (ID) इस ग्रुप में पाई गई, जिसके बाद वाराणसी में लोकेशन ट्रेस कर यह बड़ी कार्रवाई की गई।

डिजिटल साक्ष्यों की जांच: मोबाइल और लैपटॉप जब्त

शाम करीब 6 बजे तक चली इस कार्रवाई में अधिकारियों ने अबु बकर के पास से निम्नलिखित चीजें कब्जे में ली हैं:

  1. स्मार्टफोन: व्हाट्सऐप और टेलीग्राम चैट्स की फॉरेंसिक जांच के लिए।

  2. लैपटॉप: संदिग्ध फाइल्स और ब्राउजिंग हिस्ट्री खंगालने के लिए।

  3. अन्य डिजिटल डिवाइस: स्टोरेज और क्लाउड डेटा की रिकवरी के लिए।

परिवार और स्थानीय लोगों में हड़कंप

मोहल्ले के लोगों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि अबु बकर एक ‘शांत और पढ़ाकू’ छात्र है और उसका व्यवहार कभी संदिग्ध नहीं रहा। वहीं, डॉ. आरिफ का परिवार इस अचानक हुई कार्रवाई से गहरे सदमे में है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अक्सर ‘लोन वुल्फ’ या ‘स्लीपर सेल’ मॉड्यूल में कम उम्र के और साफ छवि वाले युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए ‘रेडिकलाइज’ करने की कोशिश की जाती है।

अगला कदम: 22 अप्रैल को पेशी

ATS की टीम पूछताछ के बाद वापस लौट गई है, लेकिन अबु बकर को क्लीन चिट नहीं मिली है। परिवार को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे 22 अप्रैल को महाराष्ट्र ATS के समक्ष पेश हों। वहां जब्त किए गए डिजिटल डेटा और अबु बकर के बयानों का मिलान किया जाएगा ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसकी भूमिका केवल एक सदस्य के रूप में थी या वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा था।

मुख्य बिंदु:

  • यूपी और महाराष्ट्र ATS की संयुक्त टीम ने आदमपुर के पठानी टोला में दी दबिश।

  • NEET की तैयारी कर रहे 18 वर्षीय अबु बकर से लंबी पूछताछ, डिजिटल डिवाइस जब्त।

  • मुंबई में दर्ज FIR और कश्मीरी टेलीग्राम ग्रुप के जरिए खुले राज।

  • संदिग्ध नेटवर्क का संबंध कथित तौर पर पाकिस्तान के हाफिज सईद तक होने का अंदेशा।

सावधानी नोट: सुरक्षा एजेंसियां लगातार युवाओं को सोशल मीडिया पर अज्ञात टेलीग्राम ग्रुप्स और संदिग्ध लिंक से दूर रहने की सलाह दे रही हैं। अनजाने में ऐसी गतिविधियों का हिस्सा बनना गंभीर कानूनी संकट में डाल सकता है।

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