काबुल. पिछले कई हफ्तों से बारूद की गंध और धमाकों से दहल रही पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा (डूरंड लाइन) से एक राहत भरी खबर सामने आई है। ईद-उल-फितर के पवित्र अवसर पर दोनों देशों ने आपसी सहमति से 5 दिनों के अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) का ऐतिहासिक ऐलान किया है।
यह कदम न केवल सीमावर्ती नागरिकों के लिए सुकून लेकर आया है, बल्कि मध्य पूर्व के देशों की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता को भी दर्शाता है।
🤝 अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का असर: सऊदी, कतर और तुर्की आए साथ
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तारड़ ने बुधवार को प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि यह फैसला पाकिस्तान ने अकेले नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि सऊदी अरब, कतर और तुर्की के विशेष अनुरोध और मध्यस्थता के बाद दोनों पड़ोसी देश युद्ध रोकने पर सहमत हुए हैं।
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प्रभावी समय: 19 मार्च की आधी रात से 24 मार्च की आधी रात तक।
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उद्देश्य: रमजान के समापन और ईद के दौरान मानवीय सहायता और शांति सुनिश्चित करना।
⚠️ ‘सद्भावना’ के साथ पाकिस्तान की सख्त चेतावनी
भले ही पाकिस्तान ने इसे “इस्लामी उसूलों” के तहत उठाया गया कदम बताया है, लेकिन चेतावनी का लहजा बेहद सख्त है। सूचना मंत्री ने साफ कर दिया कि यदि इस 120 घंटे के दौरान:
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सीमा पार से उकसावे की कार्रवाई हुई,
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कोई ड्रोन हमला हुआ,
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या पाकिस्तान के भीतर कोई आतंकी घटना दर्ज की गई,
तो पाकिस्तानी सेना पहले से कहीं अधिक ‘तीव्र और घातक’ जवाबी हमला करेगी।
तालिबान सरकार का रुख: ‘हमने भी रोकीं अपनी तोपें’
पाकिस्तान के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने भी अपने सैन्य अभियानों को अस्थायी रूप से रोकने की पुष्टि की है। काबुल स्थित रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सीमा पर तैनात कमांडरों को ‘रक्षात्मक मुद्रा’ (Defensive Mode) में रहने के निर्देश दिए गए हैं।
हालिया विवाद की जड़: तनाव तब चरम पर पहुंच गया था जब अफगानिस्तान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल में एक ‘नशा मुक्ति केंद्र’ पर एयरस्ट्राइक की, जिसमें निर्दोष लोगों की जान गई। हालांकि, पाकिस्तान इसे आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक बताता रहा है।
🔍 विश्लेषण: क्या यह ‘स्थायी शांति’ की आहट है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्धविराम ‘एक घाव पर पट्टी’ जैसा है, इलाज नहीं। इसके पीछे तीन मुख्य चुनौतियां हैं:
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अविश्वास की खाई: डूरंड लाइन (सीमा विवाद) को लेकर दोनों पक्षों में गहरा मतभेद है।
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TTP का मुद्दा: पाकिस्तान का आरोप है कि ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ को अफगान सरजमीं से मदद मिल रही है।
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सुरक्षा का सवाल: 24 मार्च के बाद क्या फिर से वही खूनी मंजर देखने को मिलेगा?
📌 निष्कर्ष
फिलहाल, 5 दिनों के लिए ही सही, सीमा पर सन्नाटा शांति का प्रतीक बना हुआ है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में वार्ता के नए द्वार खुल सकते हैं। लेकिन, पाकिस्तान की ‘कंडीशनल’ (शर्तों वाली) घोषणा यह बताती है कि विश्वास अभी भी कोसों दूर है।
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