देहरादून | शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026
उत्तराखंड की ‘धामी सरकार’ ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की सीमाओं और सार्वजनिक भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार्य नहीं होगा। ताजा मामले में, हिमाचल प्रदेश से उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले पांवटा साहिब-देहरादून मार्ग पर लगे ‘भूरे शाह मजार’ के सभी साइन बोर्ड जिला प्रशासन द्वारा हटा दिए गए हैं। यह कार्रवाई न केवल यातायात की सुगमता के लिए, बल्कि वन भूमि के संरक्षण के उद्देश्य से भी की गई है।
शिकायत से समाधान तक: त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई
इस कार्रवाई की जड़ें मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज एक जन शिकायत में हैं। शिकायतकर्ता ने आपत्ति जताई थी कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे ये धार्मिक बोर्ड न केवल नियमों के विरुद्ध हैं, बल्कि यात्रियों को भ्रमित भी करते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े रुख के बाद, विकासनगर परगना अधिकारी और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की संयुक्त टीम ने त्वरित एक्शन लिया और कुछ ही घंटों में मार्ग को ‘साइन बोर्ड’ मुक्त कर दिया।
अवैध निर्माण और ‘फ्रेंचाइजी’ मजारों का विवाद
प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई है कि संबंधित मजार कालसी वन क्षेत्र की भूमि पर स्थित है। वन विभाग ने इस निर्माण को अवैध घोषित करते हुए पहले ही नोटिस चस्पा कर दिया था। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में हालिया जांचों में ‘फ्रेंचाइजी मजारों’ का एक नया चलन सामने आया है, जहां एक ही पीर के नाम पर अलग-अलग स्थानों पर कई मजारें बना दी जाती हैं ताकि सरकारी जमीन पर कब्जा किया जा सके। ‘भूरे शाह’ के नाम पर भी प्रदेश में कई संरचनाएं चिह्नित की गई हैं।
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हाईकोर्ट पहुंचा मामला
जहाँ प्रशासन इस मजार को हटाने की तैयारी में है, वहीं मजार के खादिमों ने इस कार्रवाई को उत्तराखंड उच्च न्यायालय (High Court) में चुनौती दी है। न्यायालय अब यह तय करेगा कि संबंधित ढांचा वैध है या नहीं। तब तक के लिए प्रशासन ने राजमार्ग के किनारे से अतिक्रमण के प्रतीकों (बोर्ड्स) को हटाकर अपनी मंशा साफ कर दी है।
आंकड़ों में अब तक की कार्रवाई
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ध्वस्त मजारें: अब तक पूरे प्रदेश में 572 से अधिक अवैध मजारें हटाई जा चुकी हैं।
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मुक्त भूमि: लगभग 11,000 एकड़ सरकारी और वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है।
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चिह्नित स्थल: करीब 1000 ऐसी संरचनाएं अभी भी जांच के दायरे में हैं।
प्रशासन का पक्ष: विकासनगर एसडीएम विनोद कुमार ने बताया, “राजमार्ग से बोर्ड हटाना पहला चरण था। वन भूमि पर अतिक्रमण के संबंध में विभाग को पत्र भेजा गया है, और कानून सम्मत कार्रवाई जारी रहेगी।”
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