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लंदन में नफरत का खौफनाक चेहरा: एक मासूम युवती की जिंदगी और सपनों पर भारी पड़ा नस्लवाद

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लंदन । शनिवार, 25 अप्रैल 2026

अक्टूबर 2025 में लंदन के वॉल्सल (Walsall) इलाके में एक ऐसी घटना घटी जिसने ब्रिटिश न्याय व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए। 32 वर्षीय जॉन एशबी, जो पहले से ही आपराधिक प्रवृत्ति का रहा है, ने एक बेगुनाह महिला को सिर्फ उसकी पहचान के आधार पर निशाना बनाया।

आरोपी ने पीड़िता का बस से पीछा किया और जैसे ही उसने अपने घर का दरवाजा खोला, उसने हमला कर दिया। यह हमला केवल शारीरिक नहीं बल्कि एक ‘हेट क्राइम’ (Hate Crime) था, क्योंकि हमलावर लगातार इस्लाम विरोधी गालियां दे रहा था।

पीड़िता का संघर्ष: “मैं मुस्लिम नहीं हूँ”

अदालत की सुनवाई के दौरान यह दर्दनाक तथ्य सामने आया कि पीड़िता बार-बार चिल्लाकर कह रही थी कि वह मुस्लिम नहीं है, लेकिन नफरत में अंधे हो चुके एशबी पर इसका कोई असर नहीं हुआ। उसने न केवल महिला को शारीरिक चोटें पहुँचाईं, बल्कि उसे अपमानित भी किया और घर में रखे कीमती सामान लूटकर फरार हो गया।

न्याय की जीत: बर्मिंघम क्राउन कोर्ट का फैसला

इस मामले की सुनवाई Birmingham Crown Court में हुई। जज जस्टिस पेप्परॉल ने एशबी के कृत्य को “घृणित और कायरतापूर्ण” बताते हुए समाज के लिए उसे खतरा माना।

  • सजा का विवरण: आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। उसे कम से कम 14 साल जेल में गुजारने होंगे, जिसके बाद ही उसकी पैरोल पर विचार किया जा सकता है।

  • अदालत की टिप्पणी: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नस्लीय नफरत और धार्मिक कट्टरता के आधार पर किए गए अपराधों के लिए कोई जगह नहीं है।

टूटे सपने: शादी की दहलीज से पैनिक अटैक तक

पीड़िता के लिए यह केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं थी। जनवरी 2026 में होने वाली उसकी शादी इस घटना की भेंट चढ़ गई। उसने अदालत में अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वह अब अपने ही घर में सुरक्षित महसूस नहीं करती। वह आज भी पैनिक अटैक और गहरी चिंता (Anxiety) से जूझ रही है और दवाइयों के सहारे अपनी जिंदगी पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है।

नोट : 

  • स्थान स्पष्टीकरण: हालांकि यह घटना वॉल्सल (Walsall) में हुई थी, लेकिन इसकी सुनवाई बर्मिंघम क्राउन कोर्ट में की गई।

  • अपराध की श्रेणी: इसे कानूनी रूप से ‘Racially Aggravated Assault’ और ‘Robbery’ की श्रेणी में रखा गया है।

  • आरोपी का इतिहास: रिपोर्ट्स के अनुसार, जॉन एशबी का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, जिसे जज ने सजा सुनाते समय ध्यान में रखा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।