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बड़ी साजिश का पर्दाफाश: बंद खाते से 42 करोड़ रुपये निकाल कर LTTE को दोबारा खड़ा करने की थी तैयारी, ED का बड़ा खुलासा

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मुंबई । गुरुवार, 21 मई 2026

प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भारत में प्रतिबंधित संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) को फिर से सक्रिय करने की एक बेहद चौंकाने वाली अंतरराष्ट्रीय साजिश का भंडाफोड़ किया है। इस पूरे मामले के केंद्र में श्रीलंका की एक महिला नागरिक मैरी फ्रांसिस्का और उसके भारतीय सहयोगी शामिल हैं, जो एक मृत महिला के निष्क्रिय बैंक खाते से करोड़ों रुपये उड़ाने की फिराक में थे।

डेनमार्क से जुड़ा था साजिश का ताना-बाना

जांच एजेंसियों द्वारा दायर चार्जशीट के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क के तार सीधे डेनमार्क से जुड़े हुए थे। वहां मौजूद LTTE के पुराने सदस्य उमाकांतन को इस साजिश का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। उमाकांतन ने भारत (विशेषकर तमिलनाडु) में इस स्लीपर सेल या नेटवर्क को चलाने, उसके रोजमर्रा के खर्चों और ऑपरेशन्स को ऑपरेट करने के लिए शुरुआती फंड (Seed & Sustenance Money) के रूप में लगभग 1.66 करोड़ रुपये अवैध रास्तों से भेजे थे। इसी रकम का इस्तेमाल भारत में फर्जी दस्तावेज तैयार करने और लॉजिस्टिक्स जुटाने के लिए किया गया।

निष्क्रिय खाते से 42.28 करोड़ रुपये निकालने का ‘मास्टर प्लान’

इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य सिर्फ फंड हासिल करना नहीं, बल्कि भारत के भीतर ही मौजूद एक निष्क्रिय पड़े खजाने पर कब्जा करना था। इसके लिए मैरी फ्रांसिस्का को विशेष रूप से श्रीलंका से भारत भेजा गया था।

  • निशाने पर था मुंबई का बैंक खाता: मुंबई के इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) में दिवंगत हमीदा ए. लालजी का एक खाता था, जिसमें 42.28 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जमा थी और यह खाता लंबे समय से ‘इनऑपरेटिव’ (निष्क्रिय) था।

  • फर्जी पहचान का जाल: इस पैसे को निकालने के लिए मैरी फ्रांसिस्का ने फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी, जाली वोटर आईडी, नकली पैन (PAN) कार्ड और नकली पहचान पत्र [पहचान दस्तावेज संशोधित] तैयार करवा लिए थे।

जब बैंक को हुआ शक, तो दी गई ‘हिंदी बोलने की ट्रेनिंग’

जब मैरी फ्रांसिस्का ने पहली बार बैंक से संपर्क साधा, तो इतनी बड़ी रकम और दस्तावेजों को देखकर बैंक अधिकारियों को कुछ संदेह हो गया। इसके बाद साजिशकर्ताओं ने अपना प्लान बदला। उन्होंने हमीदा लालजी के बेटे और असली वारिस इस्कंदर लालजी की नकली पहचान तैयार करने की साजिश रची।

इसके लिए इस गैंग ने ई. मोहन नाम के एक स्थानीय आरोपी को चुना। मोहन को बाकायदा इस बात की ट्रेनिंग दी गई कि उसे मुंबई जाकर बैंक अधिकारियों के सामने कैसे पेश होना है। उसे हिंदी बोलना और खास तौर पर “मेरा नाम इस्कंदर ए. लालजी है” का सही उच्चारण करना सिखाया गया, ताकि वह बैंक को चकमा देकर पैसे ट्रांसफर करवा सके।

चेन्नई एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी और जांच

इस पूरी अंतरराष्ट्रीय साजिश का अंत तब हुआ जब 2 अक्टूबर 2021 को तमिलनाडु पुलिस की क्यू ब्रांच (CID) ने मैरी फ्रांसिस्का को चेन्नई एयरपोर्ट से उस समय दबोच लिया, जब वह देश से बाहर भागने की फिराक में थी। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए NIA और ED ने जांच अपने हाथ में ली।

नवीनतम अपडेट 

शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में मद्रास हाईकोर्ट के एक पूर्व जज जस्टिस एन. कन्नदासन का नाम सामने आने से हड़कंप मच गया था। जांच एजेंसी ने दावा किया था कि फ्रांसिस्का ने उन्हें दो पोस्ट-डेटेड चेक दिए थे। हालांकि, गहन वित्तीय फॉरेंसिक जांच के बाद ED ने साफ किया है कि पूर्व जज के खिलाफ इस आतंकी फंडिंग या साजिश में सीधे शामिल होने के कोई पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं, जिसके कारण उन पर कोई केस दर्ज नहीं किया गया है।

इसके विपरीत, चेन्नई के एक स्थानीय व्यवसायी के. बास्करन की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। बास्करन की कंपनी के खातों में विदेशों से संदिग्ध लेन-देन पाए गए हैं, जिसका इस्तेमाल इस नेटवर्क के लोगों तक पैसे पहुंचाने के लिए (मनी लॉन्ड्रिंग) किया जा रहा था। फिलहाल इस मामले में कोर्ट की कार्रवाई और आगे की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।

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