नई दिल्ली । गुरुवार, 21 मई, 2026
हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सनसनी मचाने वाले व्यंग्यात्मक राजनीतिक संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को लेकर एक बड़ी खबर आई है। महज़ 5 दिनों के भीतर सोशल मीडिया के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त करने वाले इस डिजिटल आंदोलन के मुख्य एक्स (पहले Twitter) हैंडल @CJP_2029 को भारत में ब्लॉक (Withheld) कर दिया गया है।
यह कार्रवाई तब हुई है जब इंस्टाग्राम पर इस संगठन के फॉलोअर्स की संख्या देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा (BJP) से भी आगे निकल चुकी है।
क्या है पूरा मामला और X पर कार्रवाई की वजह?
16 मई 2026 को शुरू हुए इस मंच का एक्स अकाउंट सर्च करने पर अब भारत में ‘Account Withheld’ का नोटिस दिखाई दे रहा है। प्लेटफॉर्म के मुताबिक, यह कार्रवाई एक आधिकारिक ‘कानूनी मांग’ (Legal Demand) के जवाब में की गई है, जिसके तहत इस हैंडल को केवल भारत के भौगोलिक क्षेत्र में प्रतिबंधित किया गया है।
अकाउंट ब्लॉक होने के तुरंत बाद, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने तंज कसते हुए लिखा, “जैसा कि उम्मीद थी, कॉकरोच जनता पार्टी का अकाउंट भारत में रोक दिया गया है।” हालांकि, आंदोलन को जारी रखते हुए उन्होंने एक्स पर तुरंत एक नया बैकअप हैंडल @Cockroachisback लॉन्च कर दिया, जिसे कुछ ही घंटों में हजारों लोगों ने फॉलो कर लिया।
कैसे हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत?
इस आंदोलन की नींव के पीछे देश के युवाओं का गुस्सा और सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी है। 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत (Chief Justice of India / Senior Judge) ने सोशल मीडिया पर वकीलों और कुछ लोगों के रवैये को लेकर टिप्पणी की थी।
जस्टिस सूर्यकांत का बयान: “कुछ ऐसे युवा हैं, जो कॉकरोच की तरह हैं, जिन्हें कोई रोजगार नहीं मिलता या पेशे में कोई जगह नहीं मिलती। उनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया, आरटीआई कार्यकर्ता और अन्य कार्यकर्ता बन जाते हैं और वे हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।”
हालांकि बाद में इस पर स्पष्टीकरण भी आया कि यह टिप्पणी केवल ‘फर्जी डिग्री’ और सिस्टम का दुरुपयोग करने वालों के संदर्भ में थी, लेकिन सोशल मीडिया पर युवाओं ने इसे देश के बेरोजगारों का अपमान माना। इसी के जवाब में 30 वर्षीय राजनीतिक रणनीतिकार अभिजीत दीपके ने व्यंग्य (Satire) के रूप में CJP का गठन कर दिया, जिसे ‘आलसी और बेरोजगार युवाओं की आवाज’ बताया गया।
इंस्टाग्राम पर रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े: BJP को भी पीछे छोड़ा
भले ही एक्स पर इस हैंडल को रोक दिया गया हो, लेकिन इंस्टाग्राम पर इसका जलवा बरकरार है। CJP ने डिजिटल दुनिया में लोकप्रियता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं:
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फॉलोअर्स की बाढ़: लॉन्च होने के महज 4-5 दिनों के भीतर CJP के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 1.35 करोड़ (13.5+ Million) से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं।
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भाजपा से बड़ी संख्या: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल के फॉलोअर्स की संख्या लगभग 88 लाख (8.8 Million) है, जिसे CJP ने बहुत बड़े अंतर से पछाड़ दिया है।
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वेबसाइट रजिस्ट्रेशन: CJP की आधिकारिक वेबसाइट पर अब तक 1 लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं और 6 लाख से अधिक डिजिटल रजिस्ट्रेशन का दावा किया जा रहा है।
कौन हैं CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके? (AAP से कनेक्शन)
इस अनोखे मीम-आधारित और हाइपर-आयरॉनिक आंदोलन को हवा देने वाले अभिजीत दीपके पुणे से पत्रकारिता में स्नातक हैं और वर्तमान में बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस की पढ़ाई कर रहे हैं।
उनकी अचानक बढ़ी लोकप्रियता के बाद नेटिजन्स ने उनके राजनीतिक इतिहास को भी खंगालना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अभिजीत दीपके साल 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया और चुनाव अभियान टीम का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP के लिए मीम-आधारित सफल अभियान चलाया था। इसी वजह से विरोधी सोशल मीडिया पर इस संगठन को निष्पक्ष व्यंग्य के बजाय एक सोची-समझी राजनीतिक ‘प्रोपोगैंडा’ (Propaganda) भी कह रहे हैं।
CJP की सदस्यता के लिए रखी गईं ‘अनोखी शर्तें’
इस व्यंग्यात्मक आंदोलन से जुड़ने के लिए बेहद मजाकिया और कटाक्ष से भरी शर्तें रखी गई हैं, जो सीधे तौर पर देश की मौजूदा बेरोजगारी और व्यवस्था पर तंज कसती हैं:
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व्यक्ति का बेरोजगार होना।
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स्वभाव से पूरी तरह आलसी होना।
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रोज़ाना लंबे समय तक इंटरनेट/सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना।
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प्रोफेशनल तरीके से शिकायत करने (Rant) की क्षमता होना।
इस डिजिटल मंच को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आज़ाद जैसे विपक्ष के कुछ चर्चित चेहरों का भी सोशल मीडिया पर परोक्ष समर्थन मिला है। जानकारों का मानना है कि भले ही यह एक मजाक या मीम के रूप में शुरू हुई नकली पार्टी हो, लेकिन यह देश के युवाओं के भीतर छिपी आर्थिक बेबसी, महंगाई और बेरोजगारी के गहरे गुस्से को बयां करती है।
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