लंदन । गुरुवार, 23 अप्रैल, 2026
लंदन, जिसे दुनिया के सबसे समावेशी शहरों में से एक माना जाता है, आजकल एक गंभीर विवाद के केंद्र में है। हाल ही में हुई एक खोजी जांच (Investigation) ने खुलासा किया है कि शहर के रेंटल मार्केट में धर्म, जाति और भाषा के आधार पर खुलेआम भेदभाव किया जा रहा है। फेसबुक और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ‘Muslim Only’ और ‘Muslim Girls Only’ जैसे हजारों विज्ञापन तैर रहे हैं, जो न केवल सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचा रहे हैं, बल्कि ब्रिटेन के सख्त भेदभाव विरोधी कानूनों को भी चुनौती दे रहे हैं।
मुख्य समस्या क्या है?
जांच के दौरान पाया गया कि मकान मालिक और रेंटल एजेंट विशेष समुदायों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। बार्किंग (Barking) और पूर्वी लंदन के कई हिस्सों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ गैर-मुस्लिम किरायेदारों को “Go Away” (यहाँ से चले जाओ) कहकर अपमानित किया गया। यह स्थिति न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि उन लोगों के लिए भी बड़ी समस्या है जो शहर में नया ठिकाना तलाश रहे हैं।
क्या कहता है ब्रिटेन का कानून (Equality Act 2010)?
ब्रिटेन में Equality Act 2010 के तहत किसी भी व्यक्ति को उसके धर्म, नस्ल, लिंग या राष्ट्रीयता के आधार पर किराये के घर से वंचित करना पूरी तरह अवैध है।
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अपराध: भेदभावपूर्ण विज्ञापन देना कानूनन जुर्म है।
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जुर्माना: दोषी पाए जाने पर मकान मालिकों पर हजारों पाउंड का जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
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EHRC की भूमिका: ‘इक्वालिटी एंड ह्यूमन राइट्स कमीशन’ ने चेतावनी दी है कि वे सोशल मीडिया कंपनियों और व्यक्तिगत विज्ञापनदाताओं पर कड़ी नजर रख रहे हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई
ताजा जानकारी के अनुसार, विवादित रिपोर्ट के बाद Gumtree और Facebook ने अपने प्लेटफॉर्म से हजारों संदिग्ध विज्ञापनों को हटाना शुरू कर दिया है। ब्रिटिश सरकार ने भी स्पष्ट संदेश दिया है कि ‘धार्मिक कट्टरता’ के लिए रेंटल मार्केट में कोई जगह नहीं है।
Matribhumisamachar


