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शर्मिष्ठा पर आरोप लगाने वाला वजाहत रशीद खुद हिन्दू धार्मिक भावनाओं को आहत करने का है आरोपी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

गुवाहाटी. पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा हाल ही में एक युवा कानून की छात्रा शर्मिष्ठा पनोली को धार्मिक भावना आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. लेकिन अब इस मामले में नया मोड़ आया है. जिस शख्स वजाहत खान कादरी रशीदी ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, उसी पर अब हिंदू देवी-देवताओं के अपमान और भड़काऊ पोस्ट करने के आरोप लग रहे हैं. वजाहत रशीद के मामले पर असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. असम पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के लिए एक टीम बंगाल भेजी है. असम सरकार ने वजाहत को गिरफ्तार करने के लिए बंगाल सरकार से मदद मांगी है.

कौन है वजाहत रशीद?

वजाहत रशीद कोलकाता स्थित ‘रशीदी फाउंडेशन’ के सह-संस्थापक हैं. उन्होंने ही शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ कोलकाता पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई. वजाहत ने सोशल मीडिया पर इस शिकायत को लेकर कई पोस्ट भी किए और बाद में गिरफ्तारी का जश्न भी मनाया. हालांकि अब सोशल मीडिया पर उनके पुराने पोस्ट्स वायरल हो रहे हैं. जिनमें उन्होंने हिंदू धर्म, भगवान कृष्ण, कामाख्या देवी मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों और हिंदू त्योहारों को लेकर आपत्तिजनक बातें लिखी थीं. इनमें से कुछ पोस्ट उन्होंने बाद में डिलीट भी कर दिए.

दो वकीलों ने दर्ज कराई शिकायत

इन भड़काऊ पोस्टों को लेकर दिल्ली के अधिवक्ता विनीत जिंदल ने दिल्ली पुलिस और साइबर क्राइम यूनिट में वजाहत रशीद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 194, 195, 356 और आईटी एक्ट की धारा 66, 67, 69 के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. एक अन्य अधिवक्ता, अमिता सचदेवा ने भी दिल्ली के साकेत साइबर थाने में वजाहत रशीद के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है. उन्होंने लिखा कि वजाहत के पोस्टों से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और वे सांप्रदायिक तनाव फैला सकते हैं.

शर्मिष्ठा पनोली ने मांगी थी माफी

वहीं, शर्मिष्ठा पनोली ने भी अपने कथित आपत्तिजनक वीडियो को डिलीट किया था और माफी मांग ली थी. बावजूद इसके, उन्हें कोलकाता की अलीपुर कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. अब सवाल उठता है कि क्या कानून सभी के लिए समान है? और क्या दोनों ही मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई होगी? यह देखना बाकी है.

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साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।