देहरादून. वसन्त पंचमी के पावन अवसर पर भू-बैकुंठ भगवान श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। यह घोषणा शुक्रवार (23 जनवरी, 2026) को नरेंद्र नगर स्थित टिहरी राजदरबार में आयोजित एक पारंपरिक धार्मिक समारोह में की गई।
🗓️ कपाट खुलने का शुभ मुहूर्त
पंचांग गणना और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार, भगवान बद्री विशाल के कपाट:
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तिथि: 23 अप्रैल, 2026 (गुरुवार)
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समय: प्रातः 6:15 बजे
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स्थान: चमोली जिला, उत्तराखंड
इस घोषणा के साथ ही उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध चारधाम यात्रा-2026 की तैयारियां आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई हैं।
🏺 गाडू घड़ा (तेल कलश) यात्रा और प्रमुख रस्में
बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया में ‘गाडू घड़ा’ परंपरा का विशेष महत्व है।
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तेल कलश यात्रा: कपाट खुलने से पहले, 7 अप्रैल 2026 को टिहरी राजदरबार में गाडू घड़ा (तेल कलश) पूजन किया जाएगा।
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अभिषेक परंपरा: इस कलश में तिलों का शुद्ध तेल होता है, जिसे डिमरी पंचायत के लोग गाजे-बाजे के साथ बद्रीनाथ पहुंचाते हैं। इसी तेल से भगवान बद्रीनाथ का महा-अभिषेक किया जाता है।
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शीतकालीन प्रवास: वर्तमान में भगवान बद्री विशाल की ‘उत्सव मूर्ति’ जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में विराजमान है, जहाँ शीतकाल के दौरान उनकी पूजा की जाती है। कपाट खुलने से कुछ दिन पहले उन्हें डोली में विराजमान कर वापस बद्रीनाथ लाया जाएगा।
🚶 चारधाम यात्रा 2026: एक नज़र में
इस वर्ष चारधाम यात्रा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 11 दिन पहले शुरू हो रही है। अन्य धामों के कपाट खुलने की संभावित तिथियां इस प्रकार हैं:
| धाम | कपाट खुलने की तिथि |
| यमुनोत्री | 19 अप्रैल 2026 (अक्षय तृतीया) |
| गंगोत्री | 19 अप्रैल 2026 (अक्षय तृतीया) |
| केदारनाथ | 22 अप्रैल 2026 |
| बद्रीनाथ | 23 अप्रैल 2026 |
🚩 दर्शन के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
यदि आप इस वर्ष यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
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पंजीकरण (Registration): चारधाम यात्रा के लिए आधिकारिक वेबसाइट (registrationandtouristcare.uk.gov.in) पर पंजीकरण अनिवार्य है।
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स्वास्थ्य: उच्च हिमालयी क्षेत्र (3133 मीटर) होने के कारण यहाँ ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, इसलिए अपना मेडिकल चेकअप जरूर कराएं।
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मौसम: अप्रैल के अंत में भी यहाँ कड़ाके की ठंड होती है, अतः भारी ऊनी कपड़े साथ रखें।
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नियम: मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल फोन और कैमरों का उपयोग प्रतिबंधित है।
विशेष नोट: इस बार कपाट ब्रह्म मुहूर्त में खुल रहे हैं, जिसे आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जाता है। अखंड ज्योति के दर्शन के लिए हज़ारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुँचने की उम्मीद है।
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