नई दिल्ली. भारत की राजनीति के लिए साल 2026 किसी ‘मिनी लोकसभा चुनाव’ से कम नहीं होने वाला है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों ने अभी से सियासी पारा गरमा दिया है। जहाँ एक ओर सत्ताधारी दल अपनी पकड़ बनाए रखने की जुगत में हैं, वहीं विपक्षी खेमे और ‘तीसरे मोर्चे’ की एंट्री ने समीकरणों को पेचीदा बना दिया है।
आइए, ओपिनियन पोल्स, पिछले परिणामों और जमीनी हकीकत के आधार पर समझते हैं कि इन 5 राज्यों में क्या खिचड़ी पक रही है।
1. पश्चिम बंगाल: ‘दीदी’ का किला या ‘दादा’ की दहाड़?
पश्चिम बंगाल में 2021 के चुनाव में ममता बनर्जी की TMC ने 213 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था, जबकि भाजपा 77 सीटों पर सिमट गई थी।
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ताजा रुझान: टीवी चैनलों के ओपिनियन पोल्स के अनुसार, राज्य में इस बार मुकाबला ‘कांटे की टक्कर’ का है।
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बड़ा फैक्टर: संदेशखाली जैसी घटनाओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को भाजपा बड़ा मुद्दा बना रही है। दूसरी ओर, ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी कल्याणकारी योजनाओं के कारण ममता बनर्जी का महिला वोट बैंक अभी भी उनके साथ मजबूती से खड़ा दिख रहा है।
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मीडिया हाइप: न्यूज़ रूम्स में इसे “मदर ऑफ ऑल बैटल्स” कहा जा रहा है, जहाँ AI टूल्स भी हार-जीत का सटीक अनुमान लगाने में पसीने छोड़ रहे हैं।
2. तमिलनाडु: स्टालिन की मजबूती बनाम अन्नामलाई का ‘क्रेज’
2021 में DMK गठबंधन ने 159 सीटें जीतकर AIADMK को सत्ता से बाहर किया था।
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नया समीकरण: इस बार केवल DMK और AIADMK की लड़ाई नहीं है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई की ‘पदयात्रा’ ने राज्य में भगवा दल के लिए एक नई जमीन तैयार की है।
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विजय (Thalapathy) फैक्टर: सुपरस्टार विजय की पार्टी TVK की एंट्री ने युवाओं के बीच हलचल मचा दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वह द्रविड़ राजनीति के वोटों में कितनी सेंध लगाते हैं।
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मुख्य मुद्दा: ‘द्रविड़ अस्मिता’ बनाम ‘सनातन धर्म’ और भ्रष्टाचार की बहस इस चुनाव के केंद्र में है।
3. केरल: क्या टूटेगी दशकों पुरानी परंपरा?
केरल का इतिहास रहा है कि यहाँ हर 5 साल में सत्ता बदलती है, लेकिन 2021 में पिनाराई विजयन (LDF) ने 99 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया था।
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चुनौती: क्या LDF लगातार तीसरी बार सत्ता में आएगी? ओपिनियन पोल्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री विजयन को तगड़ी Anti-incumbency (सत्ता विरोधी लहर) का सामना करना पड़ रहा है।
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UDF की उम्मीदें: कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF इस बार वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। वहीं, भाजपा केरल में ‘ईसाई-हिंदू’ गठबंधन के जरिए अपनी पहली बड़ी जीत की तलाश में है।
4. असम: हिमंत बिस्वा सरमा का ‘मास्टर स्ट्रोक’
2021 में भाजपा+ ने 75 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी।
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ताजा स्थिति: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पकड़ राज्य पर बेहद मजबूत मानी जा रही है।
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परिसीमन (Delimitation): हाल ही में हुए निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन ने कई सीटों के समीकरण बदल दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह भाजपा को फायदा पहुँचाने के लिए है, जबकि सरकार इसे ‘असमिया पहचान’ की रक्षा बता रही है।
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मुद्दा: घुसपैठ, लैंड जिहाद और विकास के मुद्दों पर भाजपा चुनाव को केंद्रित रख रही है।
5. पुडुचेरी: छोटी विधानसभा, बड़ी जंग
30 सीटों वाली इस विधानसभा में 2021 में AINRC+ (भाजपा समर्थित) ने 16 सीटें जीती थीं। वर्तमान रुझान यहाँ एक त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly) की ओर इशारा कर रहे हैं, जहाँ छोटे दल ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ सकते हैं।
📊 एक नजर में: 2021 बनाम 2026 (अनुमानित)
| राज्य | कुल सीटें | 2021 विजेता | 2026 की मुख्य चुनौती |
| पश्चिम बंगाल | 294 | TMC (213) | भ्रष्टाचार बनाम जन कल्याण |
| तमिलनाडु | 234 | DMK+ (159) | अन्नामलाई और विजय (TVK) फैक्टर |
| केरल | 140 | LDF (99) | सत्ता विरोधी लहर (UDF की वापसी?) |
| असम | 126 | BJP+ (75) | परिसीमन और पहचान की राजनीति |
💡 निष्कर्ष: डेटा और ग्राउंड रियलिटी में अंतर
टीवी चैनल्स के ओपिनियन पोल्स अक्सर 3% से 5% के मार्जिन ऑफ एरर के साथ आते हैं। 2026 के चुनावों में ‘माइक्रो-टारगेटिंग’ और ‘बूथ मैनेजमेंट’ की भूमिका अहम होगी। जहाँ मीडिया ‘हाइप’ और ‘ध्रुवीकरण’ पर ध्यान दे रहा है, वहीं जमीन पर मतदाता बेरोजगारी, महंगाई और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दे रहा है।
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