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पहली बार जेएनयू छात्र संघ चुनाव में विद्यार्थी परिषद ने जीती 23 सीटें

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) चुनाव में काउंसलर के पदों के लिए मतों की गिनती पूरी हो गई है। काउंसलर के 42 पदों पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शानदान प्रदर्शन किया है। उनके 23 काउंसलर चुन कर आए हैं। 25 साल बाद स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में एबीवीपी ने खाता खोलते हुए पांच में दो सीटें जीती हैं। स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में भी दो पद एबीवीपी ने जीते हैं। इसके मुकाबले आइसा-डीएसफ के गठबंधन ने सात और एसएफआइ अंबेडकराइट्स गठबंधन ने पांच सीटे जीती हैं। शेष सात सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों और अन्य छात्र संगठनों ने जीती हैं। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदाें के लिए वोटों की गिनती जारी है।

वाम संगठनों के बिखरने का नतीजा दिख रहा

जेएनयूएसयू चुनाव से पहले वाम छात्र संगठनों के बिखराव का असर चुनाव नतीजों पर साफ दिखाई दे रहा है। एबीवीपी ने कई सेंटरों में काउंसलर के सभी पद जीतकर क्लीन स्वीप किया है। लेकिन, स्कूल ऑफ लैंग्वेज के वाम किले में वह सेंध नहीं लगा सकी। यहां छह काउंसलर के पदों में उन्हें एक भी हासिल नहीं हुआ है। वाम संगठनों ने यहां जीत हासिल की है।

स्कूल ऑफ फिजिकल साइंस में तीन में से दो सीट एबीवीपी को

एबीवीपी ने स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी दो में से एक सीट, स्पेशल सेंटर फार मालिक्यूलर मेडिसिन में एक में से एक सीट, स्कूल ऑफ कम्प्यूटेशनल एंड इंटीग्रेटिव साइंस में दो में से एक सीट, स्कूल ऑफ कंप्यूटर एंड सिस्टम साइंस में तीन में से दो सीट, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में चार में से चार सीटों पर क्लीन स्वीप, स्पेशल सेंटर फार नैनोसाइंस में एक में से एक, स्कूल ऑफ संस्कृत एंड इंडिक स्टडीज में तीन में से तीन, अमलगमेटेड सेंटर में दो में दो सीट, स्कूल ऑफ एनवायरनमेंटल साइंस दो में से एक सीट, अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप में एक में एक सीट, स्कूल ऑफ फिजिकल साइंस में तीन में से दो सीट एबीवीपी ने हासिल की है।

स्कूल ऑफ लैंग्वेज में एसएफआई ने एक सीट जीती

दूसरी ओर, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया स्कूल (एसएफआई), आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआइएसएफ), बिरसा मुंडे फुले आंबेडकर स्टूडेंट्स यूनियन (बापसा) और प्रोगेसिव स्टूडेंट्स एसोसिएशन (पीएसए) के पैनल ने पांच सीटें जीती हैं। इनमें आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में एसफआइ ने एक, स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलाजी में एसएफआइ ने एक, सेंटर फार ला एंड गवर्नेंस में बापसा ने एक और स्कूल ऑफ लैंग्वेज में एसएफआइ ने एक सीट जीती है।

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आइसा और डीएसएफ ने काउंसलर की सात सीटें जीती

ऑल इंडिया स्टूडेंटस एसोसिएशन (आइसा)- डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) ने काउंसलर की सात सीटें जीती हैं। इनमें स्कूल ऑफ लैंग्वेज एंड कल्चर स्टडीज में तीन, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में दो, एसआइएस में एक और स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में एक सीट जीती है। केंद्रीय पैनल के लिए मतों की गिनती जारी है। एबीवीपी 2875 वोटों की गिनती के बाद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर बढ़त बनाए हुए है। उनका सीधा मुकाबला आइसा-डीएसएफ के यूनाइटेड लेफ्ट गठबंधन से है।

अध्यक्ष पद पर एबीवीपी की शिखा स्वराज को 860 वोट और यूनाइटेड लेफ्ट के नीतिश कुमार पीएचडी को 741 वोट मिले हैं। उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के निट्टू गौतम को 791 और यूनाइटेड लेफ्ट की मनीषा को 583 वोट मिले हैं। सचिव पद पर एबीवीपी के कुणाल राय को 933 और यूनाइटेड लेफ्ट की मुन्तेहा को 648 वोट मिले हैं। संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के वैभव मीणा को 939 और यूनाइटेड लेफ्ट के नरेश को 663 वोट मिले हैं। देर रात परिणाम जारी होने की उम्मीद है।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।