नई दिल्ली | 23 मार्च, 2026. पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ा युद्ध अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘ब्लैक होल’ बनता जा रहा है। रविवार, 22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक आपातकालीन कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक बुलाई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा युद्ध के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और खरीफ सीजन से पहले खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना था।
⚓ होर्मुज की घेराबंदी: भारत की ‘लाइफलाइन’ पर संकट
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, Strait of Hormuz पर ईरान के कड़े नियंत्रण ने भारत की नींद उड़ा दी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार:
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LPG का बड़ा झटका: भारत अपनी जरूरत का 90% LPG इसी मार्ग से आयात करता है। वर्तमान में 22 भारतीय जहाज (जिनमें 6 LPG और 1 LNG टैंकर शामिल हैं) खाड़ी में फंसे हुए हैं।
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LNG और खाद का संकट: कतर के ‘रास लफ्फान’ (Ras Laffan) कॉम्प्लेक्स पर हुए हमलों ने भारत की 41% LNG सप्लाई को खतरे में डाल दिया है। इसका सीधा असर यूरिया कारखानों पर पड़ेगा, जिससे जून में शुरू होने वाले खरीफ सीजन में खाद की भारी किल्लत हो सकती है।
🛡️ ‘ऑपरेशन संकल्प’: भारतीय नौसेना का कड़ा पहरा
भारत ने अपनी रणनीति बदलते हुए समुद्र में भारतीय नौसेना की तैनाती को दोगुना कर दिया है।
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सुरक्षित कॉरिडोर: ओमान की खाड़ी में आधा दर्जन से अधिक युद्धपोत तैनात किए गए हैं।
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सफल रेस्क्यू: हाल ही में नौसेना ने ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जैसे LPG टैंकरों को सुरक्षित बाहर निकाला है।
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रणनीतिक स्वायत्तता: भारत ने अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन में शामिल होने के बजाय, अपने जहाजों को खुद एस्कॉर्ट करने का फैसला किया है।
📉 मार्च 2026: भारत के लिए 3 सबसे बड़ी चुनौतियां
| चुनौती | वर्तमान स्थिति (Update) | सरकार का कदम |
| कच्चा तेल (Crude) | रूस से आयात 44% तक बढ़ा, जबकि खाड़ी से सप्लाई 23% घटी। | रूस के साथ ‘रुपी-रुबल’ पेमेंट और अफ्रीका (अंगोला, कांगो) से नए सौदे। |
| खाद (Fertilizer) | कतर से गैस सप्लाई बाधित होने से यूरिया उत्पादन पर खतरा। | 5.5 मिलियन टन का स्टॉक मौजूद; नैनो यूरिया के उपयोग पर जोर। |
| महंगाई (Inflation) | क्रूड $120 के पार जाने से माल ढुलाई 15% महंगी हुई। | Strategic Petroleum Reserve (SPR) से तेल निकालने की तैयारी। |
⚡ PM मोदी का ‘Triple-S’ मंत्र और भविष्य की रणनीति
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को Supply, Stability, और Security पर काम करने के निर्देश दिए हैं। सरकार अब पारंपरिक मार्गों के बजाय ‘प्लान-बी’ पर तेजी से काम कर रही है:
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अफ्रीकी देशों का रुख: भारत अब अंगोला और गैबॉन जैसे देशों से तेल की खरीद बढ़ा रहा है ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता कम हो सके।
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जमीनी मार्ग की तलाश: यूएई और सऊदी अरब के साथ मिलकर ऐसी पाइपलाइनों पर चर्चा हो रही है जो सीधे लाल सागर (Red Sea) तक पहुँचती हों, ताकि होर्मुज के खतरे से बचा जा सके।
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घरेलू राशनिंग: यदि संकट और गहराता है, तो सरकार उद्योगों के बजाय कृषि और घरों (City Gas) को गैस सप्लाई में प्राथमिकता देगी।
निष्कर्ष: 2026 का यह संकट भारत के लिए एक बड़ी परीक्षा है। जहाँ एक तरफ युद्ध की आग वैश्विक सप्लाई चेन को झुलसा रही है, वहीं भारत अपनी ‘डिप्लोमैटिक और नेवल पावर’ के दम पर अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने की हर संभव कोशिश कर रहा है।
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