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संभल: जामा मस्जिद के पास 8 बीघा कब्रिस्तान की जमीन से हटेंगे अवैध कब्जे, सिविल कोर्ट ने खारिज किया ‘स्टे’

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संभल की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के बाहर पुलिस बल की तैनाती का दृश्य।

संभल | शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ प्रशासन की बड़ी जीत हुई है। कोतवाली क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद से सटी करीब 8 बीघा कब्रिस्तान की जमीन पर बने अवैध निर्माणों को ढहाने का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। शुक्रवार को संभल की सिविल कोर्ट ने इस मामले में चल रहे ‘स्टे’ को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि कब्रिस्तान की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार्य नहीं है।

क्या है पूरा विवाद?

इस मामले की शुरुआत श्री कल्कि सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष त्यागी की एक शिकायत से हुई थी। जिलाधिकारी को सौंपे गए दस्तावेजों में दावा किया गया था कि वर्ष 1990 से पहले यह पूरी 8 बीघा जमीन सरकारी रिकॉर्ड में ‘कब्रिस्तान’ के रूप में दर्ज थी। आरोप है कि पिछले तीन दशकों में स्थानीय रसूखदारों ने इस पर अवैध रूप से पक्के मकान और दुकानें तान दीं।

प्रशासन ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए 30 दिसंबर 2025 को विवादित जमीन की पैमाइश कराई थी, जिसमें बड़े पैमाने पर अतिक्रमण की पुष्टि हुई।

कानूनी दांव-पेच और कोर्ट का कड़ा रुख

प्रशासनिक नोटिस जारी होने के बाद, कब्जाधारियों ने खुद को बचाने के लिए कानूनी शरण ली:

  1. इलाहाबाद हाईकोर्ट: सबसे पहले कब्जाधारी हाईकोर्ट पहुंचे, लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली।

  2. सिविल कोर्ट का स्टे: इसके बाद जनवरी 2026 में सलमा रानी सहित 18 कब्जाधारियों ने सिविल कोर्ट संभल में याचिका दायर की। 27 फरवरी 2026 को सिविल जज ललित कुमार ने सुनवाई पूरी होने तक ‘यथास्थिति’ (Stay) बनाए रखने का आदेश दिया था।

  3. नगर पालिका की दलील: नगर पालिका के अधिवक्ता नलिन जैन ने कोर्ट में पुख्ता साक्ष्य पेश करते हुए साबित किया कि कब्जाधारियों ने तथ्यों को छिपाकर और कोर्ट को गुमराह कर स्टे हासिल किया था।

अब आगे क्या?

सिविल जज द्वारा स्टे खारिज किए जाने के बाद अब कब्जाधारियों के पास कोई कानूनी सुरक्षा कवच नहीं बचा है। नगर पालिका परिषद और जिला प्रशासन अब तहसील कोर्ट में चल रही अंतिम औपचारिकताओं के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार:

“न्यायालय के आदेश की प्रति मिलते ही तहसील स्तर की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके तुरंत बाद भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अवैध दुकानों और मकानों को हटाने की ध्वस्तीकरण कार्रवाई शुरू की जाएगी।”

इस फैसले के बाद से जामा मस्जिद के आसपास के इलाकों में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी या धार्मिक भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्य बिंदु:

  • कोर्ट का फैसला: सिविल कोर्ट ने अवैध निर्माण पर लगी न्यायिक रोक (स्टे) को हटाया।

  • विवादित स्थल: जामा मस्जिद से सटी करीब 8 बीघा कब्रिस्तान की जमीन।

  • अगली कार्रवाई: तहसील कोर्ट की प्रक्रिया पूरी होते ही चलेगा प्रशासन का बुलडोजर।

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